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दर्द बताते भर आई आंखें ‘ऊपरवाला ही रूठ गया सा’ब’

दर्द बताते भर आई आंखें ‘ऊपरवाला ही रूठ गया सा’ब’

दर्द बताते भर आई आंखें ‘ऊपरवाला ही रूठ गया सा’ब’
कांग्रेस प्रवासी सहायता प्रकोष्ठ आया मदद को आगे, बूंदी में रोका
बूंदी. जयपुर जाने के लिए सडक़ पर घिसटते हुए एक विधवा दिव्यांग महिला, साथ में 7 साल व एक 14 वर्षीय बेटी। यह दास्तां है 35 वर्षीय जयपुर निवासी रेखा की जो बारां से किसी वाहन में बैठकर जयपुर की आस में निकली थी, लेकिन वाहन चालक उसे बायपास पर छोड़ गया। तालेड़ा के एक समाजसेवी ने बूंदी कांग्रेस के प्रवासी सहायता कंट्रोल रूम के प्रभारी चर्मेश शर्मा को सूचना दी और पीडि़त परिवार को बूंदी भेजा। इसके बाद पीडि़त परिवार को बूंदी के रैन बसेरे में ठहराया।
दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा
अपना दर्द बताते हुए दिव्यांग रेखा की आंखें भर आई। रेखा ने बताया कि वह जन्म से दिव्यांग नहीं थी। 4 वर्ष पहले जब पति कमल का निधन हुआ तो परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा। तीन लड़कियों के साथ पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई। तब कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न हो गया और शरीर में विकलांगता आ गई। इलाज कराने के लिए पैसा नहीं था। रेखा ने यही कहा ऊपरवाला ही रूठ गया सा’ब।
14 वर्ष की बेटी कर रही मजदूरी
रेखा के साथ 14 वर्षीय बेटी चीकू भी है। यों तो इसके खेलने कूदने और पढऩे की उम्र है, लेकिन अब परिवार की जिम्मेदारी इसी मासूम पर आ गई। उसके मजदूरी कर लाई गई राशि से ही सबका पेट पल रहा है। अब लॉकडाउन ने उनसे मजदूरी भी छीन ली।

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