आजाद भारत में फांसी पाने वाली पहली महिला होंगी शबनम, रिव्यू पिटीशन खारिज
समान अधिकार प्राप्त है चाहे वह स्त्री हो या महिला विवेद भी होता है तो विशेष परिस्थितियों में। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में 7 लोगों की हत्या के दोषी शबनम और उसके प्रेमी सलीम के रिव्यू पिटिशन सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि हमारी जजमेंट का सम्मान होना चाहिए। दोषी को मौत की सजा के फैसले का सम्मान करना चाहिए जो आजकल नहीं हो रहा है।
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चीफ जस्टिस ने कहा कि हर फैसले को चुनौती नहीं देना चाहिए। दोषी को सजा स्वीकार करनी चाहिए।दोषी को ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि वह हम मौत की सजा को चाहे जब चुनौती दे सकता है जैसा कि आजकल के फैसलों में बहुत अधिक हो रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि अंतहीन मुकदमें बाजी की अनुमति नहीं दी जा सकती हैं।
रिव्यू पिटिशन में कहा गया कि दोषी अनपढ़ और गरीब है। तो इसका जवाब देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि देश के बहुत से लोग गरीब और अनपढ़ हैं लेकिन यह एक रिव्यू पिटीशन है। उन्होंने कहा कि आप ये बताइए क्या जजमेंट में कोई गलती हो सकती हैं। याचिकाकर्ता के वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि अगर फांसी की सजा डालने की 1% भी चांस हो तो उस पर कोर्ट को विचार करना चाहिए।

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