निर्भया केस :जानिये उस नाबालिग आरोपी के बारे में जिसने निर्भया पर सबसे ज्यादा जुल्म किए
निर्भया के 4 दोषियों को फांसी 20 मार्च को दे दी गई है. मौत की सजा (death sentence) पाने जा रहे इन दोषियों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर के अलावा मामले में 2 और दोषी भी थे. इनमें से एक गुनहगार राम सिंह ने जेल में ही कथित तौर पर खुदकुशी कर ली थी और इसके अलावा एक और दोषी भी था. वारदात के वक्त नाबालिग होने के कारण उसे जुवेनाइल कोर्ट से 3 साल की ही कैद हुई और अब वो आजाद है.यही अकेला दोषी है, जिसका चेहरा और यहां तक कि नाम भी दुनिया नहीं जानती है. जानें, कहां है निर्भया का नाबालिग गुनहगार और कैसे बिता रहा है जिंदगी.
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क्या है निर्भया का मामला
16 दिसंबर 2012 को एक पैरामेडिकल छात्रा के साथ घटा हादसा देश के राजधानी के लिए बदनुमा दाग बन गया. 16 दिसंबर की रात निर्भया अपने एक दोस्त के साथ फिल्म देखकर लौट रही थी. रास्ते में दोनों ने मुनीरका से एक बस ली. इस बस में उनके अलावा 6 लोग है. जल्द ही उन लोगों ने निर्भया से छेड़खानी शुरू कर दी, जो रेप में बदल गई.
इस बीच निर्भया के दोस्त को दोषियों ने पीटकर बेहोश कर दिया था. बर्बर गैंग रेप के बाद उन लोगों ने खून से लथपथ निर्भया और उसके दोस्त को वसंत विहार इलाके में चलती बस से फेंक दिया. आंतों और पूरे शरीर में गंभीर इंफेक्शन के बाद एयरलिफ्ट कर निर्भया को सिंगापुर के अस्पताल ले जाया गया, जहां 29 दिसंबर की देर रात उसने दम तोड़ दिया.
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नाबालिग ने ऐसे की दरिंदगी
इस बीच वारदात में शामिल छहों आरोपी गिरफ्त में आ चुके थे, जिनमें से एक ड्राइवर राम सिंह ने जेल में ही खुदकुशी कर ली और वहीं नाबालिग आरोपी को जुवेलाइल जस्टिस के तहत सजा हुई. बाल सुधार गृह में 3 साल बिताने के बाद 20 दिसंबर 2015 को उसे रिहाई मिल गई. छहों दोषियों के बयान के बाद ये माना जाता रहा है कि इसी नाबालिग ने निर्भया और उसके दोस्त को आवाज देकर अपनी बस में बुलाया था, जबकि वो एक स्कूल बस थी, न कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट. निर्भया के बैठने के बाद उसी ने छेड़छाड़ शुरू की और अपने साथियों को रेप के लिए उकसाया. यही वो दोषी था, जिसने निर्भया के शरीर में लोहे की रॉड घुसाई, जिससे फैला इंफेक्शन 26 साल की छात्रा की मौत की वजह बना.
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दोषी का लेखा-जोखा
जानकारी के अनुसार दोषी उत्तप्रदेश का रहने वाला है, जो 11 साल की उम्र में घर की तंग हालत की वजह से भाग निकला और दिल्ली आ गया. यहां फुटपाथों पर दिन गुजारने के दौरान उसकी मुलाकात बस ड्राइवर राम सिंह से हुई. तब से वो राम सिंह के लिए क्लीनर का काम करने लगा. हालांकि राम सिंह से उसे कुछ खास पैसे नहीं मिलते थे और लगभग 8000 रुपए बकाया भी थे.
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जानकारी के अनुसार दोषी उत्तप्रदेश का रहने वाला है. 16 दिसंबर की रात उन्हीं पैसे के लिए वो राम सिंह के पास पहुंचा और वहीं से घटना की शुरुआत हुई. वारदात के वक्त उसकी उम्र 17 साल 6 महीने थी. यानी वयस्क होने में सिर्फ 6 महीने कम.




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