शकुनि मामा के यह 2 प्रयास सफल हो जाते, तो कभी नही होता महाभारत का युद्ध
महाभारत की गाथा में, कौरवों के मामश्री शकुनि को उनकी कुटिल बुद्धि के लिए जाना जाता है। धोखे, धोखाधड़ी और बुराई के विशेषज्ञ शकुनी ने युद्ध तक पांडवों के विनाश के लिए कई चालें चलीं। समाज मे कई लोगों का मानना है कि इन्हीं चालों के कारण पांडवों के जीवन में उथल पुथल रही और अंतत: युद्ध की नौबत आ गई।
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शकुनि का पहला प्रयास -
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दुर्योधन ने शकुनि के कहने पर भीम को अपने भोजन में कालकूट विष देकर गंगा नदी में फेंक दिया था। अन्य पांडव भी इससे अवगत थे। भीम अचेत अवस्था में गंगा के अंदर स्थित नागलोक पहुँचता है। अपने नाना आर्यक के कहने पर वासुकी सांप उसे बचाता है और उसके अंदर 10 दस हज़ार हथियो का बल भर देते है। वे फिर भीम को गंगा के किनारे छोड़कर चले जाते हैं। इस तरह भीम मरने से बच जाता है।
शकुनि का दूसरा प्रयास -
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जब धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर को हस्तिनापुर का युवराज घोषित किया। फिर शकुनि ने पांचों पांडवों को मारने की योजना बनाई। उन्होंने धृतराष्ट्र पर दबाव डालकर पांचों पांडवों को वारणावत भेजा, जहां उन्होंने लाक्षागृह में आग लगाकर पांडवों को जिंदा जलाने की योजना बनाई। लेकिन उसी समय महात्मा विदुर ने पांडवों को एक गुप्त संदेश भेजा और सभी पांडव जल कर मरने से बच गए।



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