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भगवान के वास्ते, अल्लाह के वास्ते मुझे छोड़ दो’ कहता रहा रफीक, पुलिस जबर्दस्ती राष्ट्रगान गवाती और पीटती रही

नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान एक वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ जिसमें दिल्ली पुलिस एक मुस्लिम युवक को प्रताड़ित करते हुए उसे राष्ट्रगान गाने को कह रही थी. दिप्रिंट से बात करते हुए रफीक की मां सलमा ने कहा, ‘पुलिस के भेष में कौन से लोग थे हमें क्या पता…हमारे बच्चे को तो हमारे इलाके के पुलिस वालों ने ही बचाया है.’
दिप्रिंट की टीम जब बुधवार को दंगा प्रभावित पूर्वोतर दिल्ली के इलाक़े में पहुंची तो वहां रफ़ीक के परिवार से बातचीत हुई. परिवार साधारण से मकान में किराए पर रहता है और दंगों के दौरान मिले ज़ख़्मों से अभी तक उबर नहीं पाया है. सलमा ने बताया कि वो और उनके बेटे दोनों मिलकर काम करते हैं. उसी से घर चलता है. दोनों ही लोग पिछले हफ्ते से बाहर नहीं जा पाए हैं.
पिछले सोमवार को बाकी के इलाक़ों की तरह कर्दमपुरी में भी माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था. उस दिन पुलिया पर बहुत शोर शराबा चल रहा था. प्रदर्शन में काफ़ी महिलाएं मौजूद थीं. इस मंज़र का ज़िक्र करते हुए बिस्तर पर लहूलुहान पड़े रफ़ीक बताते हैं, ‘ऐसा लगा जैसे दंगा हो गया, कोई पथराव कर रहा हो. मेरी अम्मी घर से बाहर थी. मैं उन्हें देखने के लिए वहां पहुंचा.’
उन्होंने कहा कि वहां पहुंचकर देखा कि पथराव हो रहा है और पुलिस वाले भी वहीं पर खड़े थे. अपने गहरे ज़ख़्मों से जूझ रहे रफ़ीक का आरोप है कि पत्थरबाज़ पुलिस के पीछे खड़े होकर सीएए विरोधी महिलाओं पर पथराव कर रहे थे.
उस दिन की घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं जब कर्दमपुरी की पुलिया पर पहुंचा तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. फिर सबके साथ मैं भी भागा. भगदड़ में लोग गिरने लगे और मैं भी गिर गया. फिर वो मुझे वहां से खींचते हुए ले गए जहां पहले से कुछ लोग पड़े हुए थे.’

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