जानिए आखिर पूरे भारत में क्यों हैं ब्रह्मा जी का केवल एक ही मंदिर, क्या है इसका सबसे बड़ा कारण?
पुष्कर की सबसे बड़ी खासियत है पूरे भारत का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर। भगवान ब्रह्मा के पूरी विश्व में एकमात्र मंदिर होने के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है इसलिए पूरे विश्व में सिर्फ पुष्कर में हैं ब्रह्मा मंदिर।
पुराणों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी हाथ में कमल का फूल लिए हुए अपने वाहन हंस पर सवार होकर अग्नि यज्ञ करने के लिए उचित जगह की तलाश कर रहे थे, तभी एक जगह पर उनके हाथ से कमल का फूल गिर गया। फूल के धरती पर गिरते ही धरती पर एक झरना बन गया और उस झरने से तीन सरोवर बन गए। जिन जगहों पर वो तीन झरने बने उन्हें ब्रह्म पुष्कर, विष्णु पुष्कर और शिव पुष्कर के नाम से जाना जाता है। यह देखकर ब्रह्मा जी ने इसी जगह यज्ञ करने का निर्णय लिया। यज्ञ में ब्रह्मा जी के साथ उनकी पत्नी का होना जरुरी था। भगवान ब्रह्मा की पत्नी सावित्री वहां नहीं थी और शुभ मुहूर्त निकल रहा था। इस कारण ब्रह्मा जी ने उसी समय वहां मौजूद एक सुदंर स्त्री से विवाह करके उसके साथ यज्ञ संपन्न कर लिया। जब यह बात देवी सावित्री को पता चली तो उन्होंने क्रोधित होकर भगवान ब्रह्मा को यह श्राप दे दिया कि जिसने सृष्टि की रचना की पूरी सृष्टी में उसी की कहीं पूजा नहीं की जाएगी। पुष्कर को छोड़ कर पूरे विश्व में भगवान ब्रह्मा का कहीं मंदिर नहीं होगा। इसी श्राप की वजह से ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर पुष्कर में है।
पुष्कर में है ब्रह्मा जी का एक मात्र मंदिर
पुष्कर को मंदिरों और घाटों की नगरी भी कहा जाता हैं। इस छोटे से नगर में लगभग चार सौ मंदिर और 52 घाट हैं, जिनका निर्माण समय-समय पर अगल-अगल राजाओं ने करवाया था। पुष्कर शहर में पुष्कर नाम का कोई मंदिर नहीं है। इस जगह का नाम पुष्कर पड़ने का कारण है इसका अर्थ। पुष्कर शब्द का अर्थ होता है- पुष्प से बना तालाब या झील।पुष्कर के पुष्कर नामक सरोवर से कुछ दूरी पर, ऊंचे पहाड़ पर भगवान ब्रह्मा का मंदिर स्थापित है। लगभग साठ सीढ़ियां चढ़ने के बाद मंदिर तक पहुंचा जाता है। मंदिर में भगवान ब्रह्मा की चार मुंह वाली सुंदर मूर्ति है, साथ ही भगवान ब्रह्मा की दूसरी पत्नी गायत्री (जिनके साथ भगवान ने यज्ञ किया) की भी प्रतिमा हैं। मंदिर के गर्भगृह के सामने एक चांदी का कछुआ बना हुआ है। मंदिर परिसर में भगवान इन्द्र, कुबेर की भी मूर्तियां हैं।

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