हरिद्वार-काशी-मथुरा-अयोध्या-उज्जैन में क्या कर रहे थे तबलीगी ?
एक बात समझ नहीं आ रही है कि हिन्दुओं के अति महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों क्रमश: हरिद्वार और बनारस में तबलीगी जमात के कार्यकर्ता निजामुद्दीन मरकज से क्यों पहुंच गए? इसके पीछे उनका इरादा क्या था? यह हरिद्वार और काशी तक ही सीमित नहीं रहा ।लगभग सभी महत्वपूर्ण हिन्दू धार्मिक स्थानों पर पहुँच गये जो वहां के निवासी नहीं थे ।आखिर हफ़्तों मरकज के जलसे के बाद इन्हें अपने घरों की याद क्यों नहीं आई ? वे किनके निर्देश पर वहां गये I
पहले बात हरिद्वार की। कोरोना वायरस की जांच से कथित तौर पर बचने का प्रयास कर रहे तबलीगी जमात के 5 सदस्यों के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है। तबलीगी जमात के ये सदस्य राजस्थान के अलवर के रहने वाले हैं और निजामुद्दीन, दिल्ली की मरकज से लौटे थे। वे जांच से बचने के लिए जानबूझकर छिपे हुए थे। इनके एक साथी में कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि भी हुई है। प्रशासन द्वारा बार-बार अपील करने और चेतावनी देने के बावजूद ये जांच कराने से बचने के लिए छिप रहे थे, क्यों ? इस कारण उन्होंने अपना और दूसरों का जीवन भी खतरे में डाल दिया। इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की मदद से उनका पता लगाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आखिर इन्हें जांच से पहरेज क्यों था? इन सवाल का जवाब तो इन्हें देना होगा।
अब बनारस की ओर चलते हैं। वहां पर तबलीगी जमात के दो सदस्यों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इनमें से एक तो दशाश्वमेध थाना क्षेत्र में रहता है। सबको पता है कि दशाश्वमेध घाट गंगातट का सुप्रसिद्ध स्थान है। इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। काशीखंड के अनुसार शिवप्रेषित ब्रह्मा ने काशी में आकर यहीं दस अश्वमेध यज्ञ किये थे । यहाँ प्रयागेश्वर का मंदिर है। हिन्दुओं के इतने महत्वपूर्ण स्थान में वह तबलीगी क्या कर रहा था ? किसे नहीं मालूम कि तबलीगी जमात का मूल मकसद तो गैर-मुसलमानों को इस्लाम से जोड़ना है। क्या ये दोनों तबलीगी बनारस में यह सब कर रहे थे? यह बिलकुल मुमकिन लगता है कि ये बेशर्मी से नवरात्रों में संक्रमण फ़ैलाने के उद्देश्य से आये थे ।
इस बीच, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से आई खबरों के अनुसार, वहां पर कुछ इंडोनेशिया के तबलीगी जमात के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पकड़ा है। बड़ा सवाल यह है कि वे दिल्ली में अपने कार्यक्रम की समाप्ति के बाद सहारनपुर में क्या झक मार रहे थे? देखिए सहारनपुर बहुत दूर नहीं है हरिद्वार के। ये कोई बहुत पुरानी बात नहीं है जब हरिद्वार हिस्सा भी हुआ करता था सहारनपुर जिले का । क्या ये सब तबतीगी जमात के सदस्य देश को कोरोना वायरस के जाल में फंसाने के इरादे से घूम रहे थे? इन्हें यह तो पता ही था कि ऋषिकेश-हरिद्वार में लाखों की संख्या में भक्त गंगा स्नान के लिये आयेंगें ।क्या इनके निशाने पर हिन्दुओं के खास धार्मिक स्थल थे? जाहिर है, इन सवालों के जवाब इन धूर्त लोगों से सघन जांच के बाद ही तो मिल सकेंगे ।

No comments