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पृथ्वीराज चौहान के मृत्यु के बाद उनकी पत्नी का क्या हुआ? आप भी जानिए

कहते हैं पृथ्वीराज की मृत्यु होने के बाद उनकी पत्नी संयोगिता और उनकी ननद प्रथा ने लाल किले में जोहर करने का निर्णय लिया। जिसे पहले 'लालकोट' कहते थे। जौहर की तैयारियां होने लगी। वही मोहम्मद गौरी का सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक महारानी संयोगिता सहित हजारों हिंदू महिलाओं को लेने का सपना संजो कर किले के बाहर डेरा डाल दिया।

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किले के चारों ओर एक गहरी खाई थी जिसमें यमुना का पानी बहता था। विशाल चिता की तैयारियां दिल्ली के लाल किले में होने लगी। इस किले की दीवार को लागना व तोड़ना शत्रु के लिए असंभव था और जब इसमें पानी देखा तो कुतुबुद्दीन हताश हुआ। लेकिन उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि जितने भी हिंदू नागरिक गुलाम के रूप में गिरफ्तार किए गए हैं इस खाई को उनकी लाशों से भर दे ।उन जिंदा गुलामों की लाशों के ऊपर चढ़कर किले की दीवार लाघने का प्रयास किया गया। इनमें हिंदू भी थे जिन्होंने अपना धर्म और संस्कृति ना छोड़कर आजीवन गुलाम रहकर असीम यातनाओं का जीवन जीने स्वीकार किया।

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कुतुबुद्दीन ऐबक के सैनिकों ने हिंदू वीरों को खाई में फेककर खाई भरने लगे। महारानी संयोगिता ने किले में प्रवेश के लिए बने पुल को तुड़वा दिया था लेकिन महारानी को पता नहीं था कि यह नया पुल हिंदू वीरों की शहादत से फिर बनेगा ।
जब खाई जिंदा शरीरों से भर गई उन्हीं लाशों पर हाथियों को निकालकर किले के दरवाजों को तोड़ने का प्रयास हाथियों ने किया ।लेकिन दरवाजे पर भारी किले लगी थी ,जो हाथियों से नहीं टूट रही थी। तब कुछ सैनिकों ने किले की दीवार पर चढ़ने का प्रयास किया जिसे दूसरी तरफ के सैनिकों ने मार दिया ।

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