क्या है ताजमहल का राज? क्यों बंद रखा जाता है इसके तहखानों को? सच्चाई होश उड़ा देगी.. कमजोर दिल वाले ना पढ़े…
मुमताज़ महल के शरीर को मम्मी के रूप में तहखाने में रखा गया है
कुछ इतिहासकारों का यह भी मानना है कि मुमताज़ महल का शरीर आज भी तहखाने में उसी हालत में दफन हैं जैसे कि वह मरने से पहले थीं। कहते हैं कि मुमताज़ महल के शरीर को यूनानी तकनीक के अनुसार संरक्षित किया गया है. इस तकनीक का इस्तेमाल इसलिए किया गया था क्योंकि इस्लाम धर्म में मृत्यु के बाद शरीर को काटना या शरीर को किसी प्रकार की क्षती पहुंचाना धर्म के खिलाफ़ और प्रतिबंधित होता है। मुमताज़ महल का निधन होने के पश्चात उनके शरीर को टिन के एक संदूक में ऐसी जड़ी-बूटियों के साथ रखा गया है जो मांस को सड़ने से रोकती है।
तहखाने में हिंदू मूर्ती और वास्तुकला का पाया जाना
1934 में दिल्ली के एक निवासी ने दीवार पर बने एक छेद के द्वारा ताजमहल के तैखाने के अंदर मौजूद एक कमरे में झांका। उसने देखा कि वह कमरा स्तंभों से बना एक बहुत बड़ा हॉल था और वह स्तंभ हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों से भरा पड़ा था। उस व्यक्ति ने उस हॉल में भगवान शिव की एक मूर्ती भी देखी। उस व्यक्ति के अनुसार कमरे में रौशनदानियां बनी हुई थी जो आमतौर पर बड़े हिंदू मंदिरों में देखने को मिलती है। उन रौशनदानियों को संगमर्मर के पत्थर से ढंका गया था जिसे देख कर लगता है कि किसी ने वहां के हिंदू मूल को छुपाने की पूरी कोशिश की थीं। वहां के स्थानीय लोगों का भी मानना है कि ताजमहल पहले एक हिंदू मंदिर था जो तेजो महालय के नाम से प्रसिद्ध था। बाद में इसे ताजमहल का रूप दे दिया गया। लेकिन सच्चाई क्या है यह आज भी किसी को नहीं पता।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 22 कमरों को इसलिए बंद रखा है ताकि इस कमरे में छिपे सच्चाई के कारण भविष्य में दंगे ना हों। यदि ताजमहल सच में कोई हिंदू मंदिर हुआ तो यह सच भी लोगों को कभी बताया नहीं जाएगा। ऐसा करने पर इस सच के चलते देश में धर्मों को लेकर अनेक विवाद प्रारंभ हो जाएंगे और इससे हिंदू-मुस्लिम के बीच विवाद का भयानक मंजर सामने आ सकता है।
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