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लॉकडाउन में एक हत्या ने भंग की कासगंज की शांति, औरत के नाम प्रॉपर्टी किए जाने को बर्दाश्त नहीं कर पाया हत्यारा

एक तरफ जहां पूरा देश कोरोनावायरस संक्रमण से जूझ रहा है वहीं यूपी के कासगंज के मोनू ने प्रॉपर्टी के लिए एक महिला को मौत के घाट उतार दिया है. वह यह मान ही नहीं पाया कि जमीन पर महिला का भी हक होता है.
कासगंज/यूपी: कासगंज जिले के होडलपुर गांव में रह रही 62 वर्षीय जामवती की गुरुवार को उनके ही पड़ोसी मोनू उर्फ देवकिशन वशिष्ठ ने गोली मारकर हत्या कर दी. ये हत्या वृद्धा के उस मकान को लेकर की गई, जिसे लॉकडाउन के दौरान वह बेच देना चाहती थी. इस मकान पर हत्यारे मोनू की नजर वर्षों से थी.
कोरोना महामारी के चलते जब पूरा देश अपनी रोजी-रोटी और जान की चिंता में डूबा है ऐसे वक्त में आंकड़ें बता रहे हैं कि अपराध का ग्राफ तेजी से गिरा है, ऐसे में वृद्धा की एक जमीन के टुकड़े को लेकर हुई हत्या अचंभित करता है. हत्या के दो दिन बाद भी घटनास्थल पर जामवती की टूटी हुई कांच की चूड़ियां, खून के धब्बे और चप्पलें पड़ी हुई थीं. यूपी पुलिस ने आरोपी को हत्या के दिन ही गिरफ्तार कर लिया है और एफआईआर भी दर्ज कर ली थी. छानबीन करने आई पुलिस टीम के कर्मी ने बताया कि मोनू जब पकड़ा गया तो उसने पुलिस वालों पर भी कट्टा तानने की कोशिश की थी.
हत्या की जगह से थोड़ी ही दूर पर मोनू की गाड़ी खड़ी है जिसके ऊपर छोटा सा झंडा लहरा रहा है. इसका एक शीशा गांववालों ने गुस्से में आकर तोड़ दिया है.
हालांकि, गली में तैनात एक पुलिसकर्मी गांव वालों के गुस्से को पाखंड बताता है, ‘इतना ही गुस्सा था तो एक दिव्यांग से वृद्धा को मरने से बचाया जा सकता था. लेकिन लोग वीडियो बनाने में मस्त थे.’
लॉकडाउन के चलते शुक्रवार को कासगंज जिले में चारों ओर शांति थी. होडलपुर गांव के लोग भी घरों की छतों से एक दो मीडियाकर्मियों और गश्त लगाती पुलिस को देख रहे हैं. हम उस गली में पहुंचते हैं जहां मोनू ने जामवती पर देसी कट्टे से तीन गोलियां दागी थीं. जिस घर के सामने जामवती का शव मिला उस घर के मालिक नंदकिशोर पहली बातचीत में तो मृतका के परिवार से कोई उठ-बैठ पर ये कहते हुए मना कर देते हैं, ‘हम ब्राह्मण हैं और मृतका किसी और जाति की. हम जानते थे कि घर को लेकर झगड़ा चल रहा है लेकिन हमारा कोई लेना देना नहीं था.’
लेकिन नंदकिशोर की पत्नी अपने दो पोतों के साथ घर के भीतर ही थीं. वो उस दिन के खौफ को बयान करते हुए कहती हैं, ‘हमने तो गोली की आवाज सुनी. बाहर निकले तो तब देखते जब हिम्मत होती. मैंने उससे कहा था कि क्यों मार रहा है. मुझे तो खुद अस्पताल ले जाना पड़ा उस वारदात के बाद.’

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