शारीरिक कमियों के बावजूद ये 5 क्रिकेटर बने दुनिया के महान खिलाड़ी, नं.5 काबिले तारीफ है
5. मार्टिन गुप्टिल - न्यूजीलैंड
दिक्कतः पैर की उंगलियां ना होना
Third party image reference
बता दे कि जब 30 सितंबर 1986 को जन्मे मार्टिन महज 13 साल के थे तो फोर्क लिफ्ट (सामान उठाने की लिफ्ट) के नीचे उनका पैर आ गया था, जिसके चलते उनके बाएं पैर की तीन उंगुलियां बुरी तरह से चोटिल हो गई थीं। डॉक्टर्स ने उंगुलियों को बचाने की काफी कोशिश की मगर जान को खतरा देखकर उन्हें मजबूरन काटना ही पड़ा। इसके चलते नन्हे मार्टिन गप्टिल को दौड़ने में भी परेशानी होती। जब वो अपने हालात से टूटते तो परिवार उनका हौसला अफजाई करता और फिर इस कमी को गुप्टिल ने कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने वापसी की, क्रिकेट में जगह बनाई और आज भी सबसे तेज रफ्तार खिलाड़ियों में जाने जाते हैं।
4. शोएब अख्तर - पाकिस्तान
दिक्कत: कोहनी में दिक्कत और सपाट पैर
Third party image reference
रावलपिंडी एक्सप्रेस का जिक्र आते ही 100 मील प्रतिघंटे रफ्तार वाली गेंद याद आती हैं. लेकिन उनका शरीर भी किसी अजूबे से कम नहीं. उनकी कोहनी 40 डिग्री तक मुड़ जाती है, जबकि आम तौर पर ये सिर्फ 20 डिग्री मुड़ती है. इसके अलावा उनके पैर सपाट थे और 5 साल की उम्र तक वो सीधे चल भी नहीं सकते थे. लेकिन उन्होंने सारी परेशानियों को दूर करते हुए सबसे तेज गेंदबाज बनकर दिखाया.
3. माइकल क्लार्क - ऑस्ट्रेलिया
दिक्कतः डेसिमेटेड इंटरवर्टेब्राल डिस्क
Third party image reference
पूर्व कंगारू कप्तान माइकल क्लार्क का वयस्क जीवन पीठ के दर्द से भरा रहा है. यही वजह है कि उन्हें बार-बार इलाज के लिए क्रिकेट से दूर रहना पड़ता था, कई बार इंजेक्शन लेकर खेलना पड़ता था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. बीमारी को हराते हुए लंबा कामयाब करियर देखा. इसके अलावा उन्हें 2005 में स्किन कैंसर भी हो गया था. लेकिन लगातार टोपी लगाने और जर्सी के नीचे प्रोटेक्टिव गियर पहनकर उन्होंने इससे भी लड़ाई की.
2. जोंटी रोड्स - साउथ अफ्रीका
दिक्कतः मिरगी
Third party image reference
दुनिया के सबसे शानदार फील्डर दक्षिण अफ्रीका के जोंटी रोड्स मिरगी से पीडित थे। लेकिन जब भी वह मैदान में खेलते थे तो ऐसा लगता था कोई मशीन मैदान में खेल रही हो। उनकी गेंद रोकने की कला या रनआउट करने की दक्षता का कोई सानी नहीं था। जोंटी रोड्स ने अपने जीवन में मिरगी की बीमारी से ख़ूब लड़ा। मिरगी होने के बावजूद उन्होंने इसे करियर में आड़े नहीं आने दिया और जीत दर्ज की। इन दिनों वो दुनिया भर में अलग-अलग टीमों को फील्डिंग के गुर सिखाते हैं।
1. मंसूर अली खान पटौदी - भारत
दिक्कतः एक आंख की रोशनी जाना
Third party image reference
टाइगर पटौदी उम्र जब 11 साल थी तब उनके पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी की मौत हो गई थी। इसके बाद मंसूर इंग्लैंड चले गए। वहां रहकर उन्होंने पढ़ाई की और क्रिकेट खेला। वह शुरू से ही जबरदस्त प्लेयर थे। वह मैदान पर खड़े होने के बाद गेंदबाज़ों के पसीने छुड़ा देते। 20 साल की उम्र में इंग्लैंड में घरेलू मैच खेलते थे।लेकिन इंग्लैंड में हुए एक कार एक्सीडेंट ने उनकी पूरी जिंदगी को बदला दिया। एक्सीडेंट इतना भीषण था कि कार का शीशा उनकी दाईं आंख में जा घुसा। एक आंख खराब होने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी के छह महीने बिस्तर पर गुजारे।





No comments